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आरबीआई ने रेपो दर 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50% की, रुख बदलकर ‘सधी हुई सख़्ती’ किया

भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने 7 अक्टूबर को रेपो दर बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दी और संकेत दिया कि निकट भविष्य में दरों में कटौती की गुंजाइश नहीं है।

लेखक नरेंद्र बुधौलिया
आरबीआई ने रेपो दर 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50% की, रुख बदलकर ‘सधी हुई सख़्ती’ किया
Photo: Anurag Vijay 03, CC BY-SA 4.0, via Wikimedia Commons. File photo of the RBI building in Mumbai.
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भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी बेंचमार्क रेपो दर 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दी है और अपने नीतिगत रुख को ‘तटस्थ’ से बदलकर ‘सधी हुई सख़्ती’ (कैलिब्रेटेड टाइटनिंग) कर दिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का यह फ़ैसला 5 से 7 अक्टूबर तक चली तीन दिन की बैठक के बाद 7 अक्टूबर को घोषित किया गया, एससीसी ऑनलाइन द्वारा प्रकाशित नीति वक्तव्य के सारांश के अनुसार। स्थायी जमा सुविधा दर अब 5.25 प्रतिशत है, जबकि सीमांत स्थायी सुविधा दर और बैंक दर, दोनों बढ़कर 5.75 प्रतिशत हो गई हैं।

आउटलुक मनी की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त की पिछली समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने रेपो दर 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखी थी और रुख तटस्थ था। ताज़ा फ़ैसले से पहले 18 से 28 सितंबर के बीच 61 अर्थशास्त्रियों के बीच कराए गए रॉयटर्स के सर्वे में 35 ने अक्टूबर में चौथाई प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद जताई थी, इसी प्रकाशन के अनुसार।

एससीसी ऑनलाइन के विवरण के मुताबिक़ समिति ने दर बढ़ाने के पक्ष में सर्वसम्मति से मतदान किया। हालांकि दो सदस्यों, नागेश कुमार और राम सिंह, ने रुख को तटस्थ ही रखने का समर्थन किया। एमपीसी ने कहा कि निकट अवधि में दरों में कटौती एजेंडे में नहीं है और उसका अगला क़दम आगे की बढ़ोतरी या ठहराव में से कुछ भी हो सकता है, जो वृद्धि और महंगाई के परिदृश्य पर निर्भर करेगा।

आरबीआई ने बताया कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई अगस्त में 4.8 प्रतिशत रही, जो जुलाई के 4.5 प्रतिशत से अधिक है। इसकी वजह खाद्य और ईंधन की ऊंची क़ीमतें रहीं, जबकि कोर महंगाई में भी फैलाव के संकेत दिखे। उसने 2026-27 के लिए औसत सीपीआई महंगाई 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया, जिसमें जुलाई-सितंबर के लिए 4.9 प्रतिशत, अक्टूबर-दिसंबर के लिए 6.0 प्रतिशत और जनवरी-मार्च के लिए 5.7 प्रतिशत का तिमाही अनुमान है। सारांश के अनुसार अगली तीन तिमाहियों में हेडलाइन महंगाई का औसत लगभग 5.8 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।

वृद्धि के मोर्चे पर आरबीआई ने 2026-27 में वास्तविक जीडीपी में 7.1 प्रतिशत की बढ़त का अनुमान लगाया और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अर्थव्यवस्था को लचीला बताया, जिसके पीछे उसने निजी खपत, निवेश और निर्यात का हवाला दिया। उसने भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की क़ीमतों में उतार-चढ़ाव, कमज़ोर मानसून के साथ अल नीनो से जुड़ी मौसमी बाधाओं और कड़ी होती वैश्विक वित्तीय स्थितियों को परिदृश्य के जोखिम के रूप में गिनाया।

रेपो दर वह दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को अल्पकालिक धन उधार देता है। इसमें बदलाव से आम तौर पर उससे जुड़े ऋणों की लागत प्रभावित होती है, हालांकि इस बदलाव को कब और कैसे आगे बढ़ाना है, यह ऋणदाता तय करते हैं। एससीसी ऑनलाइन के अनुसार बैठक का कार्यवृत्त 21 अक्टूबर को प्रकाशित होना है और एमपीसी की अगली बैठक 2 से 4 दिसंबर को निर्धारित है।

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