फर्जी एफडीआर मामलों के बाद मध्य प्रदेश आबकारी विभाग ने शराब निविदाओं में ई-बैंक गारंटी अपनाई
आबकारी विभाग अब शराब दुकान निविदाओं के लिए इलेक्ट्रॉनिक बैंक गारंटी पर निर्भर है, कूटरचित जमा दस्तावेजों के मामलों के बाद। 2026-27 की आबकारी नीति में भी पारंपरिक बैंक गारंटी और फिक्स्ड डिपॉजिट की अनुमति नहीं है।

मध्य प्रदेश आबकारी विभाग ने शराब दुकान निविदाओं के लिए इलेक्ट्रॉनिक बैंक गारंटी की व्यवस्था अपना ली है, क्योंकि लाइसेंस पाने के लिए नकली या कूटरचित एफडीआर का इस्तेमाल हुआ था, फ्री प्रेस जर्नल में 13 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने कहा कि यह प्रणाली जमा राशि के दोहराव को रोकती है और विभाग को कानूनी जटिलताओं से बचाती है।
अखबार ने बताया कि राज्य शराब दुकान निविदाओं में भाग लेने के लिए ई-बैंक गारंटी अपनाने वाला देश का पहला राज्य है और इस बदलाव को वित्त वर्ष 2025-26 से जोड़ा। आईएनएस की रिपोर्ट के अनुसार 19 फरवरी को कैबिनेट से मंजूर 2026-27 की आबकारी नीति में भी सिक्योरिटी डिपॉजिट के लिए केवल इलेक्ट्रॉनिक चालान और ई-बैंक गारंटी का प्रावधान है। इस नीति में, जो 1 अप्रैल से लागू हुई, पारंपरिक बैंक गारंटी और फिक्स्ड डिपॉजिट अब स्वीकार नहीं हैं।
इसी नीति ने स्वतः नवीनीकरण खत्म कर दिए। आईएनएस के अनुसार सभी 3,553 मौजूदा शराब दुकानों का आवंटन ई-निविदा और ई-नीलामी से होगा, जिसमें आरक्षित मूल्य चालू वर्ष की लाइसेंस फीस में 20 प्रतिशत जोड़कर तय होगा। दुकानों को बोली के लिए पांच तक के क्लस्टर में जोड़ा जाएगा और जिले इन्हें चरणबद्ध नीलामी के लिए तीन से चार समूहों में बांटेंगे। नीति के अनुसार कोई नई शराब दुकान नहीं खोली जाएगी और मौजूदा परिसर का विस्तार या स्थानांतरण नहीं हो सकेगा।
फ्री प्रेस जर्नल ने इस नई शर्त को कूटरचित वित्तीय दस्तावेजों से जुड़े कई मामलों से जोड़ा। उसने बताया कि उपमुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी को 2024-25 में एक ठेकेदार को 2.76 करोड़ रुपये की नकली व कूटरचित बैंक गारंटी जमा करने देने के आरोप में निलंबित किया गया। अखबार के अनुसार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय में मामले दर्ज हैं।
उसने दो पुराने प्रकरणों का भी उल्लेख किया। 2025 में प्रवर्तन निदेशालय ने नकली ट्रेजरी चालान और अवैध लाइसेंस से जुड़े नकली चालान घोटाले की जांच में इंदौर, भोपाल और मंदसौर में शराब ठेकेदारों पर छापे मारे, जिसमें सरकार को 49 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का अंदेशा है। रिपोर्ट के अनुसार एजेंसी ने 7.44 करोड़ रुपये नकद जब्त किए, 71 लाख रुपये बैंक खातों में रोके और कई लॉकर सील किए। अखबार ने 2020 के एक मामले का भी वर्णन किया, जिसमें ठेकेदारों ने कथित तौर पर चार वर्ष में 56 करोड़ रुपये से अधिक के नकली एफडीआर जमा किए और मामले इंदौर व जबलपुर में सामने आए।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि कई धोखाधड़ी के मामले रिपोर्ट नहीं होते क्योंकि कुछ आबकारी अधिकारी शामिल हैं। यह अखबार का दावा है; इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया शामिल नहीं थी और पुराने घोटालों के आंकड़े फ्री प्रेस जर्नल और आईएनएस के हवाले से हैं, जिनकी यहां स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई। व्यावहारिक तौर पर ई-बैंक गारंटी से यह बदलाव आता है कि जमा राशि की जांच जारीकर्ता बैंक से इलेक्ट्रॉनिक रूप से हो सकती है, जिससे आयुक्त के अनुसार दोहरे या कूटरचित दस्तावेजों के रास्ते बंद होंगे।



