भोपाल निगम ने आदमपुर लैंडफिल पांच वर्ष के लिए सौराष्ट्र की कंपनी को सौंपा, 200 करोड़ के ग्रीन बॉन्ड को मंजूरी
भोपाल नगर निगम की मेयर-इन-काउंसिल ने आदमपुर लैंडफिल के पांच वर्ष के प्रबंधन अनुबंध और 200 करोड़ रुपये के ग्रीन बॉन्ड को मंजूरी दी। रिपोर्ट के अनुसार स्थल पर रोज़ लगभग 800 टन ताजा कचरा आता है।

भोपाल नगर निगम (बीएमसी) ने आदमपुर लैंडफिल का प्रबंधन पांच वर्ष के लिए सौराष्ट्र की एक कंपनी को सौंप दिया है, फ्री प्रेस जर्नल के अनुसार। यह फैसला मेयर मालती राय की अध्यक्षता में मेयर-इन-काउंसिल ने मंगलवार को लिया। अखबार ने कंपनी का नाम नहीं बताया।
इस व्यवस्था के तहत कंपनी हर दिन स्थल पर आने वाले लगभग 800 मीट्रिक टन ताजा कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करेगी। रिपोर्ट के अनुसार कंपनी पहले से ही लैंडफिल पर 6.5 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा हटा रही है। अखबार के अनुसार नया अनुबंध 48 करोड़ रुपये का है, जबकि पहले की निविदा में यह 52 करोड़ रुपये था।
मेयर-इन-काउंसिल ने अमृत 2.0 योजना में बीएमसी के हिस्से के लिए 200 करोड़ रुपये के ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड को भी मंजूरी दी। एक अलग मद में कोलार सिक्स-लेन सड़क परियोजना में जीआई पाइपलाइन शिफ्ट करने के लिए अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई। प्रारंभिक आवंटन 8.02 करोड़ रुपये था और खर्च 53.3 लाख रुपये बढ़ गया। रिपोर्ट ने इसे भारी बढ़ोतरी बताया, हालांकि दिए गए आंकड़े इस वर्णन से मेल नहीं खाते।
पीएमआवास-एचएफई 2.0 के तहत कई आवास मदों को भी मंजूरी मिली। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए सलाहकार हितेन राठी को पैनल में लिया गया। एसआरएस इंफ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड को गंगा नगर और श्याम नगर परियोजनाओं के लिए 31 दिसंबर 2026 तक तीसरा विस्तार मिला, जबकि इस्कॉन इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड को कलखेड़ा परियोजना के लिए 31 मार्च 2027 तक का समय दिया गया। वेल्जी रत्ना सोरठिया इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड को 12 नंबर बस स्टॉप स्थल पर बाकी काम पूरा करने के लिए 31 दिसंबर 2026 तक का समय मिला और साईं कंस्ट्रक्शन को उसी स्थल के काम के लिए 31 अक्टूबर 2026 तक चौथा विस्तार मिला।
परिषद ने डिपाडी पीएमआवास-एचएफई 2.0 परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मोड में मंजूरी दी और पहले से स्वीकृत एक परियोजना रद्द की, जिसका नाम रिपोर्ट में नहीं था। साथ ही कस्तूरबा नगर में 528 मकानों के लिए 64.5 करोड़ रुपये और नयापुरा में 256 मकानों के लिए 27.5 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी और राजेंद्र नगर में 768 मकानों के लिए 12 करोड़ रुपये का न्यूनतम निविदा मूल्य तय किया।
लैंडफिल का यह फैसला कचरे की लंबे समय से चली आ रही समस्या के बीच आया है। जुलाई की फ्री प्रेस जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार भोपाल के 85 वार्डों से रोज़ लगभग 1,200 मीट्रिक टन कचरा निकलता है और 2018-19 से इस्तेमाल हो रहे आदमपुर स्थल पर वैज्ञानिक निस्तारण में देरी से कचरे के बड़े टीले बन गए हैं और गर्मियों में अक्सर आग लगती है। एनजीटी ने बार-बार आग लगने के बाद जुलाई 2023 में बीएमसी पर 1.8 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था और मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। उस समय बीएमसी ने कहा था कि वह पुराने कचरे का निस्तारण 330 दिन में पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और निजी एजेंसियां पुराना व ताजा कचरा संभालेंगी जबकि निगम निगरानी की भूमिका में रहेगा।



