कृषि

सूखे की स्थिति में आधा भारत, निगरानी मंच का आकलन; खेती और ग्रामीण आय पर दबाव

द कोर में प्रकाशित विश्लेषण के अनुसार आईआईटी गांधीनगर के ड्राउट मॉनिटर ने 23 सितंबर को देश के 51.2 प्रतिशत क्षेत्र को सूखे की स्थिति में बताया है, और कई राज्यों ने सूखा प्रभावित तहसीलें चिन्हित की हैं।

लेखक विंध्य सत्ता डेस्क
सूखे की स्थिति में आधा भारत, निगरानी मंच का आकलन; खेती और ग्रामीण आय पर दबाव
Photo: Gannu03, CC BY-SA 4.0, via Wikimedia Commons. Illustrative file photo of dry, cracked land; not from a specific location named in the article.
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आईआईटी गांधीनगर द्वारा संचालित इंडिया ड्राउट मॉनिटर के अनुसार 23 सितंबर को लगभग आधा भारत सूखे की स्थिति में था, क्योंकि कमज़ोर मानसून और लंबे सूखे दौर ने पश्चिम और दक्षिण के बड़े हिस्सों में मिट्टी को सूखा छोड़ दिया। द कोर द्वारा 13 अक्टूबर को प्रकाशित विश्लेषण के अनुसार देश के 51.2 प्रतिशत क्षेत्र का यह आंकड़ा 2 सितंबर के 46 प्रतिशत से बढ़ा है।

विश्लेषण ने 1 जून से 28 सितंबर तक मानसून की कमी 12 प्रतिशत बताई, जिसमें पंजाब, बिहार और कर्नाटक सबसे अधिक कमी वाले राज्यों में थे। बिज़नेस टुडे ने भारत मौसम विज्ञान विभाग का हवाला देते हुए पहले बताया था कि अगस्त में बारिश सामान्य से 16 प्रतिशत कम रही और यह 1901 के बाद सबसे गर्म अगस्त था, जिसके एक कारण के रूप में एल नीनो का नाम लिया गया।

द कोर ने कहा कि कृषि मंत्रालय के पोर्टल के अनुसार खरीफ की बुवाई पिछले साल की तुलना में केवल 1.21 प्रतिशत कम रही, लेकिन यह आंकड़ा उन फसलों को नहीं दर्शाता जो सूखे दौर के बाद मुरझा जाती हैं। इसमें केंद्रीय जल आयोग के 24 सितंबर के आंकड़े का भी हवाला है, जिसके अनुसार जलाशयों में क्षमता का 70.8 प्रतिशत भरा था, यानी दस साल के औसत से 11.5 प्रतिशत कम।

कई राज्यों ने औपचारिक रूप से सूखा चिन्हित करना शुरू कर दिया है। विश्लेषण के अनुसार महाराष्ट्र ने अपनी 358 में से 265 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है, कर्नाटक ने 240 में से 177 तालुका, आंध्र प्रदेश ने 21 जिलों के 688 में से 388 मंडल और राजस्थान ने 425 में से 117 तहसीलें चिन्हित की हैं। तेलंगाना ने केंद्र से अपने 621 मंडलों में से 235 को सूखा प्रभावित घोषित करने का अनुरोध किया है। विश्लेषण के अनुसार महाराष्ट्र ने जुलाई में 36,585 करोड़ रुपये की कर्ज़माफी घोषित की थी, जबकि कर्नाटक ने 40 से 50 लाख किसानों के लिए 2,500 रुपये की इनपुट सब्सिडी का एलान किया।

लेख ने ग्रामीण सुरक्षा तंत्र की भी पड़ताल की। इसके अनुसार रोजगार गारंटी योजना की जगह 1 जुलाई से नई योजना वीबी-जी राम जी लागू हुई और जुलाई से सितंबर तक काम के कुल दिन 32 प्रतिशत घटकर 41.8 करोड़ से 28.4 करोड़ रह गए। प्रति परिवार औसत काम के दिन पिछले पूरे वित्त वर्ष के 43.2 के मुकाबले इस वर्ष सितंबर तक केवल 17 रहे। ये लेखक के आकलन हैं जो सरकारी आंकड़ों पर आधारित हैं, और लेख में सरकार की ओर से इनकी पुष्टि नहीं है।

गांवों में कीमतें भी बढ़ रही हैं। विश्लेषण के अनुसार ग्रामीण महंगाई जुलाई के 4.84 प्रतिशत से अगस्त में 5.23 प्रतिशत और ग्रामीण खाद्य महंगाई 5.79 प्रतिशत से 6.13 प्रतिशत पर पहुंच गई।

आगे की स्थिति के बारे में विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने 3 सितंबर को कहा था कि एल नीनो के बहुत मजबूत होने की उम्मीद है, जिससे 2027 तक चरम मौसम का जोखिम बढ़ेगा। विश्लेषण में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का हवाला देते हुए बताया गया कि 1950 के बाद के 16 एल नीनो वर्षों में केवल सात में सामान्य से कम बारिश हुई, इसलिए यह संबंध अनिवार्य नहीं है। लेख ने यह भी कहा कि देश का सूखा प्रबंधन मैन्युअल 2016 का है और उसमें बदलाव नहीं हुआ।

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