जीएसटी परिषद की अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति ख़त्म करने और अभियोजन सीमा बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने की सिफारिश
57वीं जीएसटी परिषद ने अपराधीकरण से जुड़ी एक सिफारिश पैकेज दिया है, जिसमें छोटी चूकों पर जुर्माना घटाने और रिफंड तेज़ करने के उपाय भी हैं, लेकिन लागू होने से पहले कानूनी संशोधन ज़रूरी हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 8 अक्टूबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुई वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की 57वीं बैठक ने जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति ख़त्म करने और अभियोजन की वित्तीय सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने की सिफारिश की, टैक्सस्कैन, मनीलाइफ और ब्लिट्ज इंडिया मीडिया के अनुसार। ब्लिट्ज ने वित्त मंत्रालय की जिस विज्ञप्ति का हवाला दिया, उसके मुताबिक अधिसूचनाओं, परिपत्रों और संशोधनों के बाद ही कोई फैसला कानूनी रूप से प्रभावी होगा। 8 अक्टूबर को इन फैसलों की खबर देने वाले डेक्कन हेराल्ड ने कहा कि पैकेज के तहत रिफंड भी तेज़ी से निपटाए जाने हैं।
टैक्सस्कैन के अनुसार सीतारमण ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी का अधिकार “कर अधिकारी के हाथ से निकाल दिया गया है”, लेकिन जहां आपराधिकता साबित हो, वहां आपराधिक अभियोजन उपलब्ध रहेगा। उन्होंने कहा कि अधिकारी किसी को केवल शंका के आधार पर गिरफ्तार नहीं कर सकता और पहले प्रथम दृष्टया मामला बनाना होगा, और जोड़ा: “अपना अभियोजन मज़बूत कीजिए। तभी कानून की शक्ति अभियोजन का प्रावधान देती है।”
पीएसयू वॉच ने बताया कि पैकेज में धारा 132(3) के तहत अनिवार्य न्यूनतम छह माह की जेल की सज़ा भी हटाई गई है, यानी सज़ा “कारावास और जुर्माना” की जगह “कारावास या जुर्माना या दोनों” होगी, जिसका हवाला उसने केंद्रीय परोक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के एफएक्यू का दिया। बताए गए ढांचे में 10 करोड़ रुपये से अधिक की चोरी पर पांच वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं, जबकि 5 से 10 करोड़ रुपये के बीच की चोरी पर अधिकतम दो वर्ष। टैक्सस्कैन और पीएसयू वॉच दोनों ने बताया कि ये प्रक्रियात्मक सुधार 1 अप्रैल 2027 से लागू होने हैं।
ब्लिट्ज इंडिया मीडिया ने और उपाय गिनाए। धारा 125 के तहत सामान्य जुर्माना 25,000 रुपये से घटकर 10,000 रुपये हो जाएगा, और जहां सीजीएसटी, एसजीएसटी, आईजीएसटी और सेस मिलाकर विवादित कर 10,000 रुपये से कम हो, वहां कारण बताओ नोटिस जारी नहीं होगा, जिसका उल्लेख डेक्कन हेराल्ड ने भी किया। रिफंड दावों की पावती 15 के बजाय 10 दिन में देनी होगी, और इस अवधि में पावती न दी जाने पर दावा प्राप्त माना जाएगा।
पहले चरण में शून्य-रेटेड आपूर्ति और उलटे शुल्क ढांचे के 90 प्रतिशत रिफंड अस्थायी रूप से स्वतः मंज़ूर किए जाने हैं, ब्लिट्ज ने बताया। 5 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाले व्यापारियों पर माह के अंत तक रिटर्न भरने पर विलंब शुल्क नहीं लगेगा, ई-वे बिल वाली खेपें केवल विशिष्ट खुफ़िया सूचना पर रोकी जा सकेंगी, और रास्ते में माल को धारा 130 के तहत जब्त नहीं किया जा सकेगा।
ब्लिट्ज ने रिफंड बदलावों की तारीखें भी बताईं: इनपुट सेवाओं के इनपुट टैक्स क्रेडिट के रिफंड 1 नवंबर 2026 से और पूंजीगत वस्तुओं के रिफंड 1 अप्रैल 2027 से शुरू होंगे। चूंकि परिषद के फैसले सिफारिशें हैं, इसलिए केंद्र और राज्यों को संबंधित कानूनों में संशोधन और अधिसूचनाएं जारी करनी होंगी, और अंतिम भाषा अब तक रिपोर्ट किए गए सारांशों से अलग हो सकती है।



