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पर्यावरण और जलवायु

मध्य प्रदेश में पांच साल की सबसे कम मानसूनी बारिश; बांध अधिकतर भरे, पर पश्चिम में सूखा

दैनिक जागरण के अनुसार 30 सितंबर तक राज्य में लगभग 904 मिमी बारिश हुई, यानी 2022 के बाद सबसे कमज़ोर सीजन, जिसमें अलीराजपुर और इंदौर जैसे इलाके पिछड़ गए।

लेखक नरेंद्र बुधौलिया
मध्य प्रदेश में पांच साल की सबसे कम मानसूनी बारिश; बांध अधिकतर भरे, पर पश्चिम में सूखा
Photo: Varanya Prakash, CC BY-SA 3.0, via Wikimedia Commons. Illustrative file photo of Bargi dam, Jabalpur; not from the events described.
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दैनिक जागरण अंग्रेजी के अनुसार मध्य प्रदेश ने 2026 का मानसून पांच साल की सबसे कम मौसमी बारिश के साथ समाप्त किया है, और राज्य के पश्चिमी हिस्से पर सबसे ज्यादा असर पड़ा। 30 सितंबर तक राज्य में लगभग 904 मिमी यानी 35.6 इंच बारिश हुई, जबकि सामान्य लगभग 37.3 इंच है। यह सामान्य का 95.4 प्रतिशत है, यानी उस 96 से 104 प्रतिशत के दायरे से थोड़ा नीचे, जिसे रिपोर्ट सामान्य सीमा मानती है।

अखबार ने पांच साल के मौसमी योग की तुलना की: 2022 में लगभग 46 इंच, 2023 में 37.2 इंच, 2024 में 40.2 इंच, 2025 में 45.2 इंच और इस वर्ष लगभग 35.6 इंच। उसके अनुसार 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई और 11 जिलों में सामान्य के 80 प्रतिशत से कम, जिनमें अलीराजपुर सामान्य के आधे से भी कम बारिश के साथ सबसे प्रभावित जिलों में था। जून में बारिश सामान्य से लगभग 30 प्रतिशत कम रही और मानसून 24 जून को, यानी सामान्य से नौ दिन देर से पहुंचा। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के हवाले से कहा गया कि इस सीजन में कम समय में तेज बारिश हुई और उसके बाद लंबे अंतराल रहे, तथा पिछले वर्षों की तुलना में मजबूत मौसमी प्रणालियां कम रहीं।

शहरों में तस्वीर एक जैसी नहीं रही। रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल में 41 इंच से अधिक, यानी सामान्य से लगभग 9 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई, जबकि इंदौर में सामान्य से लगभग 27 प्रतिशत कम रही और उज्जैन का गंभीर बांध अपेक्षित स्तर तक नहीं भर सका। इंदौर का अधिकतर पानी नर्मदा से आता है, लगभग 450 मिलियन लीटर प्रतिदिन, जबकि यशवंत सागर और बिलावली से लगभग 30 मिलियन लीटर मिलता है।

भंडारण की स्थिति अकेली बारिश से अधिक बेहतर दिखती है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 54 बड़े बांधों में से 35 अपनी क्षमता के 90 प्रतिशत या अधिक भरे थे और नौ बांध 75 से 90 प्रतिशत के बीच थे, और जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने अधिकारियों को सबसे भरे इन 35 बांधों पर नज़र रखने के निर्देश दिए। अगस्त के बाद स्थिति में सुधार दिखता है, जब आईएएनएस की एक रिपोर्ट में राज्य सरकार के हवाले से बताया गया था कि बांधों में क्षमता का लगभग 49 प्रतिशत पानी था, जबकि पांच साल का औसत 59 प्रतिशत और पिछले साल 75 प्रतिशत था। दोनों रिपोर्टों के पैमाने अलग हैं, इसलिए आंकड़ों की सीधी तुलना नहीं की जा सकती।

अर्थशास्त्री देवेंद्र विश्वकर्मा ने दैनिक जागरण को कहा कि पश्चिम में कमी सीधे फसल उत्पादन को प्रभावित कर सकती है, और पश्चिमी मध्य प्रदेश में कम आवक से गांधी सागर, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, राजघाट और मानिखेड़ा जैसी पनबिजली परियोजनाओं में उत्पादन घट सकता है। रिपोर्ट के अनुसार लगभग 52 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन बोया गया, जो मालवा क्षेत्र में केंद्रित है, और भूजल पर्याप्त रूप से न भरा तो गेहूं और चने पर दबाव पड़ सकता है।

आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार 10 अगस्त को मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से आगामी रबी सीजन में कम सिंचाई वाली फसलों को बढ़ावा देने और चने के पर्याप्त बीज, खाद तथा फसल बीमा नियोजन सुनिश्चित करने को कहा था। यहां देखी गई रिपोर्टों में रीवा या अन्य विंध्य जिलों के जिलावार बारिश के आंकड़े नहीं दिए गए, इसलिए स्थानीय आंकड़े जिला प्रशासन और भारत मौसम विज्ञान विभाग से मिलान कर लेना चाहिए।

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