रेल कर्मचारियों के लिए 78 दिन का बोनस और सामाजिक सहायता योजना का पांच वर्ष का विस्तार मंज़ूर
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 14 अक्टूबर को 11 लाख से अधिक रेल कर्मचारियों के लिए उत्पादकता आधारित बोनस को मंज़ूरी दी और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को 53,428 करोड़ रुपये के खर्च के साथ जारी रखा।

ईटीवी भारत की रिपोर्ट और सीएलपीजी एनपीआरसी फाउंडेशन के कैबिनेट फैसलों पर नोट के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 14 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के ब्रीफिंग में दी गई जानकारी के मुताबिक रेल कर्मचारियों के लिए उत्पादकता आधारित बोनस और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) को पांच वर्ष के लिए जारी रखने को मंज़ूरी दी। नीचे दी गई जानकारी इन्हीं दो विवरणों पर आधारित है।
रेल बोनस के बारे में ईटीवी भारत ने बताया कि मंत्रिमंडल ने लगभग 11,40,770 रेल कर्मचारियों के लिए 78 दिन के वेतन के बराबर भुगतान को मंज़ूरी दी, जिसकी कुल लागत लगभग 2,009 करोड़ रुपये है; यह आंकड़ा वैष्णव ने ब्रीफिंग में दिया। फाउंडेशन के नोट में लागत 2,009.61 करोड़ रुपये बताई गई है और कहा गया है कि बोनस पात्र गैर-राजपत्रित कर्मचारियों को मिलेगा, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति कर्मचारी 17,951 रुपये है। नोट के अनुसार यह भुगतान 2025–26 के प्रदर्शन की मान्यता है, जिस वर्ष रेलवे ने 1,670 मिलियन टन माल और लगभग 7.41 अरब यात्री ढोए।
दूसरा फैसला एनएसएपी से जुड़ा है, जो बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों के लिए केंद्र का सामाजिक पेंशन कार्यक्रम है। नोट के मुताबिक यह योजना 2026–27 से 2030–31 तक पांच वर्ष के लिए 53,428 करोड़ रुपये के कुल खर्च के साथ जारी रखी गई है। इसका नाम बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना कर दिया जाएगा और 28 राज्यों व आठ केंद्रशासित प्रदेशों में लगभग 3.20 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंचने की उम्मीद है। वृद्धावस्था, विधवा और परिवार लाभ के घटक पहले की तरह जारी रहेंगे, नोट में कहा गया।
नोट में दिव्यांगजन संबंधी घटक में बदलावों का भी उल्लेख है। उसके अनुसार मासिक दिव्यांगता पेंशन 0 से 79 वर्ष की आयु के लिए 375 रुपये और 80 वर्ष व उससे अधिक आयु के लिए 625 रुपये तय की गई है। पात्रता के लिए बेंचमार्क दिव्यांगता की सीमा 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत की जा रही है और पात्रता जन्म से लागू होगी। कम सीमा से आम तौर पर अधिक दिव्यांगजन पात्र हो सकते हैं, हालांकि नोट में अतिरिक्त लाभार्थियों की संख्या का अनुमान नहीं दिया गया।
नोट के मुताबिक दिव्यांगता पेंशन के संशोधित दिशानिर्देश तीन महीने के भीतर जारी कर लागू किए जाने हैं। राज्य नई सीमा को कैसे लागू करेंगे और नाम बदलने का मौजूदा लाभार्थियों के रिकॉर्ड पर क्या असर पड़ेगा, इसकी जानकारी देखी गई रिपोर्टों में उपलब्ध नहीं थी।
ईटीवी भारत ने कैबिनेट ब्रीफिंग की अपनी कवरेज को विकासशील खबर बताया और केवल रेलवे का फैसला दिया, जबकि फाउंडेशन के नोट में दोनों फैसले थे। मंज़ूरियों का पूरा पाठ जानने के इच्छुक पाठक पीआईबी द्वारा जारी आधिकारिक कैबिनेट फैसले देखें, जिनमें दोनों योजनाओं की अंतिम भाषा, खर्च और लागू करने की समयसीमा होगी।



