मध्य प्रदेश

ओबीसी महासभा का 27 प्रतिशत नौकरी आरक्षण के लिए मध्य प्रदेश में तीन चरणों का आंदोलन

ओबीसी महासभा 15 अक्टूबर से जिला स्तर पर ज्ञापन देगी, फिर संभागों में धरना और नवंबर में बड़ा आंदोलन होगा। मांगों में 27 प्रतिशत आरक्षण और रोके गए पदों से प्रभावित उम्मीदवारों को राहत शामिल है।

लेखक विंध्य सत्ता डेस्क
ओबीसी महासभा का 27 प्रतिशत नौकरी आरक्षण के लिए मध्य प्रदेश में तीन चरणों का आंदोलन
Photo: Suyash Dwivedi, CC BY-SA 4.0, via Wikimedia Commons. File photo of the Madhya Pradesh Vidhan Sabha building, Bhopal; not from the protest announcement.
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मध्य प्रदेश की ओबीसी महासभा ने सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए 15 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है, फ्री प्रेस जर्नल में 14 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार। संगठन की राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य लोकेंद्र गुर्जर ने यह योजना रखी।

आंदोलन तीन चरणों में प्रस्तावित है। 15 अक्टूबर से संगठन पूरे राज्य में जिला स्तर पर ज्ञापन सौंपेगा। 28 अक्टूबर से प्रदेश के सभी संभागों में धरना और प्रदर्शन होंगे। नवंबर में प्रदेशव्यापी बड़ा आंदोलन प्रस्तावित है। रिपोर्ट के अनुसार अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक संगठन को ओबीसी वर्ग को न्याय दिलाने के ठोस कदम नहीं दिखते।

27 प्रतिशत आरक्षण के अलावा महासभा उन उम्मीदवारों के लिए राहत मांग रही है, जो 13 प्रतिशत पदों को रोके जाने से प्रभावित हैं। वह ओबीसी समुदाय की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति का वैज्ञानिक अध्ययन भी चाहती है, जो विशेषज्ञ समिति या औपचारिक आयोग द्वारा किया जाए। रिपोर्ट में राज्य सरकार की किसी प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है।

यह घोषणा आरक्षण को लेकर चल रही अनिश्चितता के बीच आई है। फ्री प्रेस जर्नल की 10 अक्टूबर की एक अलग रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भर्तियों में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण देने वाली राज्य सरकार की अधिसूचना खारिज कर दी थी, हालांकि इस रिपोर्ट में फैसले की तारीख या मामले का ब्यौरा नहीं दिया गया। भर्ती परीक्षाओं में बैठे पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों ने अखबार से कहा कि वे निराश हैं और भाजपा व कांग्रेस दोनों को जिम्मेदार मानते हैं।

ग्वालियर के रवि कौरव, जो श्रेणी-3 शिक्षक परीक्षा में शामिल हुए थे, ने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट जा सकता है, जहां अंतिम फैसले में तीन से चार साल लग सकते हैं। उन्होंने अनुमान लगाया कि इंतजार में लगभग 1,000 युवा अधिक उम्र के हो चुके हैं और आगामी भर्तियों में आवेदन का मौका खो चुके हैं। एक अन्य उम्मीदवार राजेंद्र धनगर ने तर्क दिया कि ओबीसी को आबादी के अनुपात में आरक्षण मिलना चाहिए, साथ ही यह भी कहा कि यह केवल गरीब ओबीसी उम्मीदवारों को मिलना चाहिए।

रोके गए पदों पर गुर्जर ने कहा कि विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के 13 प्रतिशत पदों को अनारक्षित श्रेणी से भरने का सरकार का फैसला हज़ारों पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को प्रभावित करेगा। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि सरकार में अदालत के सामने पिछड़े वर्ग का पक्ष प्रभावी ढंग से रखने का साहस नहीं है। ये संगठन का पक्ष है और सरकार की प्रतिक्रिया के बिना दर्ज हुए हैं।

इस विवाद का अदालतों में लंबा इतिहास रहा है। जुलाई 2025 में फ्री प्रेस जर्नल ने बताया था कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य से पूछा था कि 27 प्रतिशत नीति के तहत 13 प्रतिशत पद क्यों खाली हैं, जो याचिकाकर्ताओं के अनुसार 2019 में लागू हुई थी, और मुख्य सचिव को शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था। अदालत ने उस समय अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया था। याचिका ओबीसी महासभा के तहत प्रभावित उम्मीदवारों ने दायर की थी।

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