विदेशी मुद्रा भंडार लगातार चौथे सप्ताह गिरकर $734.6 अरब, रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब
रिपोर्टों के अनुसार 2 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार $12.95 अरब घटा, जबकि रुपया डॉलर के मुकाबले 96.97 के अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब कारोबार करता रहा।

बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार 2 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार चौथे सप्ताह गिरा और $12.95 अरब घटकर $734.6 अरब रह गया। यह गिरावट 4 सितंबर को समाप्त सप्ताह के $785.7 अरब के रिकॉर्ड स्तर के बाद आई है, यानी एक महीने में भंडार लगभग $51.1 अरब कम हुआ है। 25 सितंबर को समाप्त सप्ताह में अब तक की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट, $18.3 अरब की, दर्ज हुई थी और भंडार $747.6 अरब रहा था।
सबसे बड़े घटक विदेशी मुद्रा आस्तियां $10.7 अरब घटकर $604.7 अरब रहीं, जबकि स्वर्ण भंडार $2.3 अरब घटकर $106.4 अरब रह गया। विशेष आहरण अधिकार मामूली बढ़कर $18.7 अरब हो गए और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में भारत की आरक्षित स्थिति घटकर $4.8 अरब रही। बिजनेस स्टैंडर्ड ने बताया कि इस दौरान सोना 2.5 प्रतिशत गिरकर $4,177 प्रति औंस पर और डॉलर सूचकांक 1.12 प्रतिशत चढ़कर 102.10 पर रहा, जिससे गैर-डॉलर परिसंपत्तियों और सोने का डॉलर मूल्य घटा।
भारतीय रिज़र्व बैंक रुपये को संभालने के लिए डॉलर भी बेचता रहा है, जबकि ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा था और विदेशी निवेशक पैसा निकालते रहे। बिजनेस स्टैंडर्ड में उद्धृत बाजार अनुमानों के अनुसार सितंबर में शुद्ध डॉलर बिक्री करीब $30 अरब रही। बिजनेस टुडे के अनुसार केंद्रीय बैंक ने हाजिर बाजार में बिक्री और वायदा बाजार में सेल-बाय स्वैप का इस्तेमाल किया है।
बिजनेस टुडे के अनुसार रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 96.68 से 97 के आसपास कोट हो रहा था, जो मई में बने 96.97 के रिकॉर्ड निचले स्तर से करीब 0.2 प्रतिशत दूर है, और 2026 में अब तक 7 प्रतिशत से अधिक कमजोर हो चुका है। रिपोर्ट ने इस दबाव का कारण महंगे कच्चे तेल, बढ़ती वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार निकासी को बताया; विदेशी निवेशकों ने इस साल भारतीय शेयरों में लगभग $30 अरब की बिकवाली की है।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि भंडार पर्याप्त है। बिजनेस स्टैंडर्ड ने उन्हें यह कहते हुए उद्धृत किया कि भारत के पास लगभग 11 महीने के आयात का कवर है और भंडार बाहरी कर्ज का 94.4 प्रतिशत है। बिजनेस टुडे के अनुसार उन्होंने यह भी कहा कि रुपया अवमूल्यित हो सकता है और बाजार अल्पावधि में अतार्किक व्यवहार कर सकते हैं।
विश्लेषक इस बात को लेकर सतर्क रहे कि अकेली नीति क्या हासिल कर सकती है। बिजनेस टुडे के अनुसार एचडीएफसी बैंक की अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता ने कहा कि ब्याज दर बढ़ाना मुद्रा के लिए कमजोर अल्पकालिक सुरक्षा है, क्योंकि उसे तेल, शेयर मूल्यांकन, विदेशी निकासी और डॉलर की मजबूती संचालित करते हैं। एचडीएफसी बैंक को वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में रुपये के डॉलर के मुकाबले 96 से 98 के दायरे में रहने की उम्मीद है, जबकि मेकलाई फाइनेंशियल सर्विसेज ने कहा कि 97 के ऊपर टूटने पर यह 98.50 की ओर जा सकता है।
पश्चिम एशिया संकट के दौरान 26 जून को समाप्त सप्ताह में भंडार पहले $666.9 अरब तक गिरा था और फिर संभला था। बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार इसमें एफसीएनआर(बी) जमाओं के लिए रियायती स्वैप विंडो से मदद मिली, जिससे 8 जून से 31 अगस्त के बीच खुली अवधि में 18 सितंबर तक $143.6 अरब आए। आरबीआई का अगला साप्ताहिक भंडार आंकड़ा बताएगा कि गिरावट जारी रही या नहीं।



