मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए ज़ोहो मेल अनिवार्य

सरकार ने साइबर हमलों और डेटा सुरक्षा का हवाला देकर सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को ज़ोहो मेल पर लाने का निर्णय लिया है। ईमेल पते वही रहेंगे, केवल बैक-एंड ज़ोहो के क्लाउड पर जाएगा।

लेखक विंध्य सत्ता डेस्क
मध्य प्रदेश में सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए ज़ोहो मेल अनिवार्य
Photo: Christopher Bowns, CC BY-SA 2.0, via Wikimedia Commons. Representative image of a data centre, not in Madhya Pradesh.
साझा करेंFacebookXWhatsApp

मध्य प्रदेश सरकार ने अपने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए ज़ोहो मेल अनिवार्य कर दिया है, द हितवाद में 13 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार। यह निर्णय भोपाल में मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एमपीएसईडीसी) और राष्ट्रीय सूचनाविज्ञान केंद्र (एनआईसी) के बीच उच्चस्तरीय बैठक में अंतिम हुआ। रिपोर्ट में निर्देश जारी करने वाले किसी अधिकारी या विभाग का नाम नहीं है और माइग्रेशन पूरा करने की समयसीमा भी नहीं बताई गई।

सरकार ने साइबर हमलों में तेजी और संवेदनशील सरकारी डेटा तक अनधिकृत पहुंच की आशंका को कारण बताया है। अखबार ने इस कदम को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेइटवाई) और एनआईसी के नेतृत्व वाली एक राष्ट्रीय परियोजना का हिस्सा बताया, जिसका लक्ष्य सुरक्षित और आत्मनिर्भर डिजिटल व्यवस्था बनाना और गूगल व माइक्रोसॉफ्ट जैसे विदेशी क्लाउड प्रदाताओं पर निर्भरता कम करना है।

उपयोगकर्ताओं के लिए यह बदलाव मुख्यतः पर्दे के पीछे का है। द हितवाद ने बताया कि mp.gov.in और nic.in जैसे डोमेन वाले ईमेल पते वैसे ही रहेंगे और केवल बैक-एंड ढांचा ज़ोहो के क्लाउड पर जाएगा। हर अधिकारी को सुरक्षित क्लाउड स्टोरेज के साथ अलग इनबॉक्स मिलेगा। अखबार ने ज़ोहो को एक भारतीय निजी आईटी कंपनी बताया, जिसके सर्वर भारत में हैं और एनआईसी के रणनीतिक नियंत्रण में काम करते हैं, और कहा कि प्लेटफॉर्म सीएरटी-इन सुरक्षा ऑडिट और ज़ीरो-ट्रस्ट आर्किटेक्चर का पालन करता है।

रिपोर्ट में लागत और नियम भी बताए गए। राज्य प्रति मेलबॉक्स प्रति वर्ष 2,000 रुपये का रखरखाव शुल्क देगा और लगातार 45 दिन तक लॉगिन न किए गए इनबॉक्स अपने आप निष्क्रिय हो जाएंगे। इसलिए जो कर्मचारी शासकीय मेल कम देखते हैं, उन्हें खाता सक्रिय रखने के लिए नियमित लॉगिन करना पड़ सकता है।

द हितवाद ने इस निर्णय को वृहत्तर राष्ट्रीय बदलाव के संदर्भ में रखा। उसके अनुसार अप्रैल 2026 में केंद्र ने संसद को बताया था कि 16.68 लाख सरकारी खाते 180.10 करोड़ रुपये की लागत से ज़ोहो पर लाए जा चुके हैं और ज़ोहो ने 2023 में 20 सुरक्षा ऑडिट के बाद सात वर्ष का अनुबंध जीता। ये राष्ट्रीय आंकड़े अखबार के हवाले से हैं और इस लेख के लिए स्वतंत्र रूप से नहीं जांचे गए।

यह कदम केंद्र स्तर के ऐसे ही कदमों के बाद उठाया गया है। द ट्रिब्यून ने अक्टूबर 2025 में बताया था कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने अपने अधिकारियों को माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस या गूगल वर्कस्पेस के बजाय ज़ोहो के राइटर, शीट और शो जैसे उपकरण इस्तेमाल करने का निर्देश दिया था, जिसे उसने डिजिटल संप्रभुता की दिशा में पहल कहा और लिखा कि अन्य मंत्रालय भी इसका अनुसरण कर सकते हैं। अंडर सेक्रेटरी द्वारा जारी यह आदेश मध्य प्रदेश के निर्णय से अलग है, जो राज्य सरकार के सभी ईमेल खातों पर लागू होता है।

साझा करेंFacebookXWhatsApp

संबंधित खबरें