बेमौसम बारिश से पंजाब और हरियाणा की मंडियों में जलभराव, धान की कटाई में देरी
अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में बारिश, तेज हवा और आंधी-तूफान से उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में खरीद केंद्रों में पानी भर गया और खड़ी धान की फसल बिछ गई। खेतों में नुकसान का आकलन अभी लंबित है।

रूरल वॉइस और समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्टों के अनुसार, बीते कुछ दिनों की बेमौसम बारिश, तेज हवा और आंधी-तूफान से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में अनाज मंडियों में जलभराव हो गया है और खड़ी धान की फसल बिछ गई है। यह ऐसे समय हुआ है जब खरीफ की कटाई और सरकारी खरीद शुरू हो रही है।
रूरल वॉइस के मुताबिक पंजाब में 10 अक्टूबर को सुबह 8.30 बजे से 24 घंटों में 2.3 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि उस दिन का सामान्य औसत 0.4 मिमी है। सबसे ज्यादा 28 मिमी बारिश फाजिल्का में हुई, इसके बाद फरीदकोट में 9 मिमी और मुक्तसर में 7.7 मिमी। फाजिल्का अनाज मंडी के कुछ हिस्सों में करीब तीन फुट तक पानी भरने की खबर है, और खन्ना, बटाला तथा गुरदासपुर की मंडियों में भी धान भीग गया। हरियाणा में अंबाला और करनाल की मंडियों में पानी भरने की जानकारी दी गई।
एएनआई ने बताया कि मंडियों में रखा लाखों क्विंटल धान खराब हुआ, हालांकि उसने सटीक आंकड़ा नहीं दिया। किसान नरेश कुमार ने एजेंसी से कहा कि पानी निकलने का कोई रास्ता नहीं था और भीगी हुई कई बोरियां उनकी थीं। अंबाला के किसानों ने अधिकारियों की लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि मंडी में जल निकासी और भंडारण के इंतजाम नाकाफी थे। ये किसानों के आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बारिश से खेतों में काम भी धीमा पड़ा है। रूरल वॉइस के अनुसार 10 अक्टूबर तक पंजाब में करीब 12 प्रतिशत धान ही कटा था, और प्रभावित इलाकों में कटाई चार से सात दिन टल सकती है। गीली और गिरी हुई फसल में कंबाइन हार्वेस्टर आसानी से नहीं चल पाते, और खरीद के दौरान ताजा कटे अनाज में नमी हमेशा चिंता का विषय रहती है, हालांकि रिपोर्टों में इस सप्ताह की नमी के आंकड़े नहीं दिए गए।
उत्तर प्रदेश में तूफान से पेड़ उखड़ गए और कुछ जगह ओले गिरे। रूरल वॉइस के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिलाधिकारियों, वन प्रभागीय अधिकारियों और राज्य वन निगम को राहत देने तथा गिरे पेड़ हटाने के निर्देश दिए। उसी रिपोर्ट में बताया गया कि राज्य ने 12 अक्टूबर को घोषणा की कि नौ लाख से अधिक किसानों के खातों में 493 करोड़ रुपये भेजे जा रहे हैं, लेकिन यह राशि बाढ़, अधिक बारिश, ओलावृष्टि और चक्रवात से हुए पहले के नुकसान की है, ताजा बारिश की नहीं।
रूरल वॉइस ने कहा कि अक्टूबर के नुकसान का कोई समेकित, आधिकारिक राज्यवार आकलन उपलब्ध नहीं है और राज्यों के कृषि विभागों के खेत-स्तरीय सर्वे अभी बाकी हैं। जब तक ये सर्वे पूरे नहीं होते, खेतों की फसल और मंडियों में पहुंच चुके अनाज को हुए नुकसान का दायरा साफ नहीं हो पाएगा।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 12 और 13 अक्टूबर को पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 40 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार की हवाओं और हल्की से मध्यम बारिश का पूर्वानुमान जताया था। एएनआई के अनुसार अंबाला में येलो अलर्ट जारी है और 15 अक्टूबर तक बारिश तथा आंधी जारी रहने की संभावना है। क्षेत्र के किसान और मंडी समितियां खरीद केंद्रों पर बेहतर जल निकासी और ढके हुए भंडारण की मांग उठा सकती हैं।



