मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड: अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सुनाई मौत की सज़ा
मेरठ की अदालत ने 14 अक्टूबर को सौरभ राजपूत की 2025 में हुई हत्या के मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सज़ा सुनाई। इस मामले ने देशभर का ध्यान खींचा है।

उत्तर प्रदेश के मेरठ की एक अदालत ने 14 अक्टूबर को मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सज़ा सुनाई। यह मामला व्यापक रूप से नीले ड्रम हत्याकांड के नाम से जाना जाता है। न्यूज़बाइट्स, फ्री प्रेस जर्नल और दैनिक जागरण की अंग्रेज़ी वेबसाइट, तीनों ने इस सज़ा की ख़बर दी। दोनों को 30 सितंबर को दोषी ठहराया गया था।
फ्री प्रेस जर्नल के अनुसार ज़िला एवं सत्र न्यायालय ने, जिसकी अध्यक्षता न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने की, 126 सुनवाइयों और 22 से अधिक गवाहों की गवाही के बाद दोनों को दोषी ठहराया। न्यूज़बाइट्स ने बताया कि मुक़दमा 13 महीने चला। सज़ा सुनाए जाने के दौरान दोनों मेरठ ज़िला जेल से वीडियो कॉन्फ़्रेंस के ज़रिए पेश हुए और कड़ी सुरक्षा रही।
फ्री प्रेस जर्नल द्वारा बताए गए अभियोजन पक्ष के विवरण के अनुसार राजपूत 24 फ़रवरी 2025 को लंदन से मेरठ लौटे थे और 3 मार्च 2025 को उनकी हत्या हुई। अभियोजन का आरोप था कि मुस्कान और साहिल ने उनके खाने में नशीली दवा मिलाई और सोते समय उन पर हमला किया, फिर शव के टुकड़े कर उसे प्लास्टिक के ड्रम में रखकर सीमेंट से सील कर दिया गया। ये अदालत में रखे गए आरोप हैं, और देखी गई रिपोर्टों में फ़ैसले का पूरा तर्क नहीं दिया गया है।
अख़बार के अनुसार पुलिस ने बताया कि इसके बाद दोनों शिमला और मनाली गए, और मुस्कान ने कथित तौर पर लगभग 13 दिन तक इंस्टाग्राम पर तस्वीरें और वीडियो डालकर यह दिखाने की कोशिश की कि वह पति के साथ घूम रही है। मामला 18 मार्च को सामने आया, जब राजपूत के छोटे भाई राहुल घर पहुँचे, उन्हें दिए गए स्पष्टीकरण पर शक हुआ और उन्होंने बदबू महसूस की, जिसके बाद पुलिस को बुलाया गया।
सज़ा के सवाल पर न्यूज़बाइट्स ने बताया कि अभियोजन ने अधिकतम सज़ा की मांग की और सरकारी वकील कृष्ण कुमार चौबे ने कहा कि अदालत ने गंभीर अपराधों में उचित सज़ा पर सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला दिया। दैनिक जागरण के अनुसार बचाव पक्ष ने अदालत से कम करने वाली परिस्थितियों पर विचार करने को कहा, जिनमें दंपती के बच्चों का भविष्य और देखभाल शामिल थी, और रिपोर्ट में सज़ा के पीछे के तर्क का ब्योरा नहीं दिया गया। न्यूज़बाइट्स के अनुसार दोषसिद्धि के बाद राजपूत के परिवार ने दोनों के लिए मौत की सज़ा की मांग की थी।
न्यूज़बाइट्स ने जेल अधिकारियों के हवाले से भी जानकारी दी। वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने कहा कि दोनों दोषी चिंतित और परेशान थे, बहुत कम खा रहे थे और ठीक से सो नहीं रहे थे। मुस्कान ने अपनी सात साल की बेटी से मिलने की इच्छा जताई थी, और पुलिस ने बुधवार को बताया कि बच्ची को अभी तक जेल नहीं लाया गया है।
भारतीय क़ानून के तहत सत्र न्यायालय द्वारा दी गई मौत की सज़ा पर अमल से पहले हाईकोर्ट की पुष्टि ज़रूरी होती है, और दोषियों को अपील का अधिकार है। दैनिक जागरण के अनुसार आगे की अपीलें और कार्यवाही मामले की अगली दिशा तय करेंगी। विंध्य सत्ता ने स्वयं फ़ैसला नहीं देखा है, और ऊपर का विवरण नामित प्रकाशित रिपोर्टों पर आधारित है।



