एमपी हाईकोर्ट: सिर्फ मामला दर्ज होने पर शस्त्र लाइसेंस निलंबित नहीं हो सकता
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक पूर्व सैनिक के शस्त्र लाइसेंस के अनिश्चितकालीन निलंबन को रद्द करते हुए कहा कि केवल आपराधिक मामला दर्ज होना पर्याप्त नहीं है। लाइसेंसिंग प्राधिकारी को आठ सप्ताह में पुनर्विचार करना होगा।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि सिर्फ इसलिए कि लाइसेंस धारक के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज हुआ है, शस्त्र लाइसेंस निलंबित नहीं किया जा सकता। लाइवलॉ और लॉचक्र के अनुसार जस्टिस गजेंद्र सिंह की इंदौर पीठ ने घनश्याम यादव बनाम मध्य प्रदेश राज्य मामले में अनिश्चितकालीन निलंबन को रद्द कर दिया। लॉचक्र ने आदेश की तारीख 24 सितंबर 2026 बताई है, जबकि लाइवलॉ ने 28 सितंबर को फैसले की रिपोर्ट दी।
रिपोर्टों के विवरण के अनुसार याचिकाकर्ता पूर्व सैनिक हैं और राज्य की एक बिजली वितरण कंपनी में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करते हैं, जिस काम के लिए वैध लाइसेंस और लाइसेंसी हथियार ज़रूरी है। लॉचक्र के अनुसार एक निजी विवाद के बाद 2 नवंबर 2024 को भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत दो प्रति-एफआईआर दर्ज हुईं। उन्होंने 8 नवंबर 2024 को नरसिंहगढ़ थाने में अपनी बंदूक स्वेच्छा से जमा की। 19 दिसंबर 2024 को लाइसेंसिंग प्राधिकारी, जिसे लाइवलॉ ने राजगढ़ कलेक्टर बताया है, ने उनका लाइसेंस अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि हथियार का कभी दुरुपयोग नहीं हुआ और लोक शांति या सुरक्षा के लिए खतरे का कोई आधार नहीं था, जो शस्त्र अधिनियम की धारा 17(3)(ब) के तहत निलंबन का आधार है। दोनों रिपोर्टों के अनुसार सुनवाई के दौरान राज्य के वकील ने स्वीकार किया कि विचारण अदालत ने 10 सितंबर 2026 को याचिकाकर्ता और सह-अभियुक्तों को बरी कर दिया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि शस्त्र अधिनियम के तहत लाइसेंस राज्य द्वारा दिया गया विशेषाधिकार है, अधिकार नहीं। लेकिन उसने पाया कि लाइसेंसिंग प्राधिकारी ने धारा 17(3) के अनुरूप कोई संतुष्टि दर्ज नहीं की और केवल लंबित मामले पर भरोसा किया। लाइवलॉ और लॉचक्र दोनों आदेश का यह अंश उद्धृत करते हैं कि केवल मामला दर्ज होने के कारण लाइसेंस निलंबित नहीं किया जा सकता। अदालत ने निलंबन को मनमाना और बिना विचार किए पारित कहा।
याचिका स्वीकार कर दिसंबर 2024 का आदेश रद्द कर दिया गया। लॉचक्र के अनुसार मामला प्रमाणित प्रति मिलने के आठ सप्ताह के भीतर नए सिरे विचार के लिए लाइसेंसिंग प्राधिकारी को लौटा दिया गया। प्राधिकारी को याचिकाकर्ता को प्रभावी सुनवाई देनी होगी और आपराधिक मामलों की स्थिति, जिसमें उनका निपटारा भी शामिल है, लाइसेंस मिलने के बाद उनका आचरण और लोक शांति या सुरक्षा से जुड़ी किसी भी सामग्री पर विचार करना होगा।
लाइवलॉ के अनुसार अदालत ने यह भी कहा कि प्राधिकारी को धारा 17 के तहत अपनी स्वतंत्र और तर्कसंगत संतुष्टि दर्ज करनी होगी और वह केवल आपराधिक मामले के दर्ज होने या लंबित होने अथवा दुरुपयोग की मात्र आशंका पर कार्रवाई नहीं कर सकता। लॉचक्र ने नोट किया कि अदालत ने आपराधिक मामलों के गुण-दोष या याचिकाकर्ता के लाइसेंस पाने के अंतिम हक पर कोई राय नहीं दी, इसलिए नया निर्णय लाइसेंसिंग प्राधिकारी के पास ही रहता है।



