मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट के पैनल ने कहा: वन्यजीव पर्यटन स्थानीय समुदायों को लाभ दे
भोपाल में मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट के वक्ताओं ने कहा कि वन्यजीव पर्यटन को संरक्षण और आजीविका के लाभ से आंका जाना चाहिए, और संजय व बांधवगढ़ जैसे क्षेत्रों का नाम लिया।

भोपाल में मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 के दौरान आयोजित एक पैनल के वक्ताओं के अनुसार, वन्यजीव पर्यटन को पर्यटकों की संख्या के बजाय संरक्षण और स्थानीय आजीविका को दिए जाने वाले लाभ के आधार पर परखा जाना चाहिए। वनइंडिया ने 9 अक्टूबर को बताया कि यह सत्र कार्यक्रम के दूसरे दिन कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में हुआ। पैनल का शीर्षक था "भारत के जंगलों का जीवंत परिदृश्य: मध्य प्रदेश में वन्यजीव, समुदाय और टिकाऊ पर्यटन"।
पर्यटन मंत्रालय के सचिव भुवनेश कुमार ने मुख्य भाषण दिया। वनइंडिया के अनुसार उन्होंने कहा कि सफलता को संरक्षण और आजीविका में योगदान से मापा जाना चाहिए, और उदाहरण के लिए कूनो में चीता संरक्षण का उल्लेख किया। उन्होंने सुझाया कि पर्यटकों को बाघ देखने से आगे के अनुभव भी दिए जा सकते हैं, जैसे चंबल में डॉल्फिन दर्शन, गिद्ध संरक्षण और गिद्धों के प्रजनन स्थलों के पास पूर्णिमा की रात नौकायन। उन्होंने पर्यटकों के प्रशिक्षण और स्थानीय आतिथ्य के प्रशिक्षण की भी बात कही।
मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के सचिव (पर्यटन) एवं प्रबंध निदेशक डॉ. इलायराजा टी. ने भारत में जन्मी एक चीता द्वारा पांच शावकों को जन्म देने को एक उत्साहजनक पड़ाव बताया, साथ ही कहा कि इन जानवरों को पहले ढलने में समय लगा। उन्होंने यह भी कहा कि रातापानी को नए बाघ अभयारण्य के रूप में विकसित किया जा रहा है। मध्य प्रदेश इकोटूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एल. कृष्णमूर्ति ने रातापानी, सातपुड़ा, संजय और वीरांगना दुर्गावती को विकासाधीन क्षेत्र बताया और पर्यटकों की सुरक्षा, गाइड व चालकों के प्रशिक्षण तथा समुदाय की भागीदारी पर ज़ोर दिया। संजय सीधी जिले में, विंध्य क्षेत्र में है।
उद्योग जगत के वक्ताओं ने भी इसी तरह की बातें कहीं। एंडबियॉन्ड एशिया के टोबी सिंक्लेयर ने कहा कि वन्यजीव पर्यटन में केवल बाघ नहीं, बल्कि जंगल, परिदृश्य, पक्षी और स्थानीय जीवनशैली भी शामिल होनी चाहिए, और प्रशिक्षित कथावाचकों के महत्व पर ज़ोर दिया। सीजीएच अर्थ एक्सपीरिएंस होटल्स के डेविड राजू ने बेहतर प्रशिक्षित गाइड की ज़रूरत बताई और कहा कि छोटे, सूक्ष्म तरीके से तैयार अनुभव किसी गंतव्य को यादगार बनाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार पैनल ने कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सातपुड़ा, पन्ना और माधव को वन्यजीव पर्यटन की संभावना वाले वन क्षेत्रों में गिनाया।
रिपोर्ट में प्रकृति मार्गदर्शन, होमस्टे, क्षेत्रीय भोजन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक अनुभवों को ऐसे तरीके बताया गया है जिनसे ग्रामीण समुदाय पर्यटन से कमाई कर सकते हैं। इसमें कोई आगंतुक आंकड़े, बजट, या चीता शावकों के जन्म और रातापानी के अधिसूचन की तारीखें नहीं दी गई हैं।
आयोजन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार ट्रैवल मार्ट मध्य प्रदेश पर्यटन द्वारा आयोजित होता है और चार दिन चलता है। कार्यक्रम में उद्घाटन सत्र, प्रदर्शनी, पैनल और गोलमेज़ चर्चाएं, खरीदार-विक्रेता बैठकें और विदेशी टूर ऑपरेटरों से मुलाकात शामिल है। साइट पर आयोजन से पहले और बाद के परिचय दौरों की भी सूची है, जिनमें भोपाल, भीमबेटका, माधै और पचमढ़ी वाला वन्यजीव व विरासत सर्किट शामिल है। पेज पर कैलेंडर तारीखें या भागीदारों की संख्या नहीं है, और खरीदारों व प्रदर्शकों के काउंटर असली आंकड़ों की जगह प्लेसहोल्डर दिखाते हैं। रिज़र्व की यात्रा की योजना बनाने वाले पर्यटकों को मौजूदा प्रवेश नियम और बुकिंग व्यवस्था वन विभाग या मध्य प्रदेश पर्यटन से जांच लेनी चाहिए।



