मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में 800 मेगावाट बिजली की कमी, ग्रामीण इलाकों में बिना सूचना कटौती

राज्य में लगभग 800 मेगावाट बिजली की कमी है और गांवों में अनियोजित कटौती हो रही है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के अनुसार उत्पादन बढ़ाया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर बिजली खरीदी जाएगी।

लेखक विंध्य सत्ता डेस्क
मध्य प्रदेश में 800 मेगावाट बिजली की कमी, ग्रामीण इलाकों में बिना सूचना कटौती
Photo: Emmit97, CC BY-SA 4.0, via Wikimedia Commons. File photo of a thermal power station in Madhya Pradesh; it does not depict the shortage described in the report.
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मध्य प्रदेश में लगभग 800 मेगावाट बिजली की कमी है, जिसके कारण बिना पूर्व सूचना के बिजली कटौती हो रही है और इसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीण इलाकों में दिख रहा है। फ्री प्रेस जर्नल की इस माह प्रकाशित भोपाल की रिपोर्टों के अनुसार राज्य सरकार उत्पादन बढ़ाने में जुटी है और जरूरत पड़ने पर बिजली खरीदने को तैयार है।

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि मानसून के दौरान कोयला आधारित बिजली उत्पादन आमतौर पर एक से दो प्रतिशत घट जाता है। उन्होंने बताया कि कोयला आधारित उत्पादन अधिकतम करने और रखरखाव में चल रहे संयंत्रों को जल्द से जल्द शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में कोयले का भंडार पर्याप्त है और पनबिजली संयंत्रों से भी उत्पादन लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जरूरत होने पर जनहित में बिजली खरीदी जाएगी।

अधिकारी राष्ट्रीय बाजार की तंगी का भी हवाला देते हैं। फ्री प्रेस जर्नल ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सोमवार को राष्ट्रीय एक्सचेंज पर खरीदारों ने लगभग 70,000 मेगावाट की बोली लगाई, जबकि विक्रेताओं ने केवल लगभग 700 मेगावाट की पेशकश की। पावर मैनेजमेंट कंपनी के कार्यकारी निदेशक राजीव गुप्ता ने इस माह के शुरू में कहा था कि कम बारिश के बाद उपलब्धता घटी है और अब खरीदार विक्रेताओं से अधिक हैं। अखबार ने इस तंगी को अल नीनो मौसमी घटना से जोड़ा। गुप्ता ने कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश और केरल भी कमी झेल रहे हैं और मध्य प्रदेश तुलनात्मक रूप से बेहतर स्थिति में है।

गुप्ता ने राज्य की मांग लगभग 14,000 मेगावाट बताई और कहा कि उत्पादन लगभग उतना ही है, इस अंतर को संभालने के लिए वितरण कंपनियां लोड नियंत्रण कर रही हैं। इसी रिपोर्ट के अनुसार कम जलस्तर या मरम्मत कार्य के कारण आठ जलविद्युत यूनिट बंद हैं, जिनमें गांधी सागर और राजघाट बांध की छह यूनिट भी शामिल हैं, जो पानी की कमी के कारण जल संसाधन विभाग की पाबंदियों के तहत निष्क्रिय हैं। वार्षिक ओवरहॉल या बॉयलर ट्यूब लीकेज के कारण कई ताप विद्युत यूनिट भी बंद हैं, जिनमें विंध्याचल, गड़वारा, खलगांव, सासन और बीना की यूनिटें शामिल हैं।

ग्रामीण नागरिकों और विधायकों ने इन कटौतियों की शिकायत की है। कांग्रेस विधायक बाला बच्चन और प्रताप ग्रेवाल ने कहा कि बिना पूर्व सूचना के बिजली गुल हो रही है। ग्रेवाल ने बताया कि उनका आदिवासी बहुल सरदारपुर क्षेत्र, जहां कम बारिश हुई है, इससे प्रभावित है और वे इस मुद्दे को विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र में उठाना चाहते हैं। रिपोर्टों के अनुसार कटौती 30 मिनट से एक घंटे तक चलती रही है, ज्यादातर शाम के समय।

सरकार ने कहा है कि वह किसानों को प्रतिदिन 10 घंटे और अन्य उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे बिजली देने के अपने वादे पर कायम है। फ्री प्रेस जर्नल के अनुसार पावर मैनेजमेंट कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बैठकें कर रहे हैं। स्थिति कितनी जल्दी सुधरती है, यह बंद पड़ी यूनिटों के लौटने और राष्ट्रीय बाजार में उपलब्धता पर निर्भर करेगा, जहां आपूर्ति अभी सीमित बताई गई है।

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