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स्टारलिंक का कहना है कि भारत में उसकी तैयारी पूरी, सरकारी अनुमति का इंतज़ार

नई दिल्ली में इंडिया मोबाइल कांग्रेस के दौरान स्टारलिंक के एक अधिकारी ने कहा कि कंपनी ने भारत में 20 गेटवे साइट तैयार कर ली हैं और सेवा शुरू करने के लिए आधिकारिक मंज़ूरी का इंतज़ार है।

लेखक विंध्य सत्ता डेस्क
स्टारलिंक का कहना है कि भारत में उसकी तैयारी पूरी, सरकारी अनुमति का इंतज़ार
Photo: M. Lewinsky, CC BY 4.0, via Wikimedia Commons. Illustrative file photo of Starlink satellites; not taken in India.
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स्पेसएक्स द्वारा संचालित सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक का कहना है कि उसने भारत में परिचालन के लिए ज़रूरी ज़मीनी ढांचा तैयार कर लिया है और अब वह सेवाएं शुरू करने के लिए सरकारी अनुमति की प्रतीक्षा में है। आउटलुक बिज़नेस और बिज़नेस टुडे की 7 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी ने नई दिल्ली में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में यह बात कही।

स्पेसएक्स में स्टारलिंक बिज़नेस ऑपरेशंस की उपाध्यक्ष लॉरेन ड्रेयर ने कांग्रेस के प्री-इवेंट बिज़नेस दिवस को संबोधित किया। आउटलुक बिज़नेस के हवाले से उन्होंने कहा कि स्टारलिंक “भारत की सेवा के लिए तैयार है, जब भारत उसके लिए तैयार हो।” उन्होंने जोड़ा कि स्थानीय नियामकीय, सुरक्षा और परिचालन संबंधी ज़रूरतें पूरी करने के लिए कंपनी लगभग पांच वर्षों से भारतीय नियामकों, उद्योग जगत और दूरसंचार कंपनियों के साथ काम कर रही है।

ड्रेयर ने बताया कि स्टारलिंक ने देश में 20 गेटवे साइट बनाई हैं, जिनमें मिलाकर सैकड़ों एंटीना लगे हैं। गेटवे ऐसे ग्राउंड स्टेशन होते हैं जो सैटेलाइट नेटवर्क को ज़मीनी इंटरनेट से जोड़ते हैं। आउटलुक बिज़नेस के अनुसार, उन्होंने कहा कि भारतीय परिचालन को सुरक्षा संबंधी ज़रूरतों के अनुरूप डिज़ाइन किया गया है, नियंत्रण व्यवस्था मौजूद है और भारतीय उपयोगकर्ताओं का डेटा देश के भीतर ही रखा जाएगा। उसी रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टारलिंक पृथ्वी की निचली कक्षा में 11,000 से अधिक उपग्रह संचालित करती है और 170 से अधिक देशों में कनेक्टिविटी देती है।

बिज़नेस टुडे ने बताया कि स्टारलिंक ने एयरटेल और जियो के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) तथा महाराष्ट्र, गुजरात और मेघालय की सरकारों के साथ आशय पत्र (एलओआई) पर हस्ताक्षर किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार कंपनी अन्य राज्य सरकारों से भी उनकी स्थानीय कनेक्टिविटी ज़रूरतों पर बातचीत कर रही है। ड्रेयर ने कंपनी की योजनाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वभौमिक कनेक्टिविटी के लक्ष्य से जोड़ा और कहा कि स्टारलिंक भारत को पूर्ण कनेक्टिविटी तक पहुंचाने में मदद कर सकती है।

ड्रेयर ने “लास्ट माइल” यानी अंतिम छोर तक पहुंच को सबसे बड़ा अवसर बताया, खासकर उन जगहों पर जहां पारंपरिक ढांचा बिछाना कठिन या महंगा है। आउटलुक बिज़नेस के अनुसार उनके दिए उदाहरणों में हिमालयी गांवों के विद्यार्थी, पूर्वोत्तर के स्वास्थ्यकर्मी, आपदा से प्रभावित समुदाय, तथा मौसम और बाज़ार की जानकारी चाहने वाले किसान और मछुआरे शामिल थे। उन्होंने यह भी कहा कि जहां फाइबर बिछाना मुश्किल है, वहां इस सेवा से 4जी और 5जी मोबाइल टावरों को जोड़ा जा सकता है।

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सेवा कब शुरू होगी। किसी भी रिपोर्ट में लॉन्च की तारीख नहीं दी गई, और आउटलुक बिज़नेस के अनुसार यह भी नहीं बताया गया कि आवेदन की समीक्षा कौन सा प्राधिकरण कर रहा है या निर्णय कब तक आ सकता है। बिज़नेस टुडे ने कहा कि कंपनी को ज़रूरी नियामकीय मंज़ूरियों का इंतज़ार है, पर लंबित मंज़ूरी का नाम नहीं बताया गया। भारतीय ग्राहकों के लिए कीमतों की घोषणा भी किसी रिपोर्ट में नहीं हुई। जब तक सरकार निर्णय नहीं लेती, एयरटेल, जियो और तीन राज्य सरकारों के साथ हुए समझौतों समेत स्टारलिंक की भारतीय योजनाएं तैयारी के चरण में ही हैं।

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